अरावली में हरियाली का प्रभावशाली क्षरण: 1300 एकड़ जंगल उजड़ गया

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अंश:

  • फरीदाबाद के पास अरावली पर्वतमाला में पिछले चार दशकों में लगभग 1300 एकड़ वन क्षेत्र से हरियाली पूरी तरह गायब हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाने के बावजूद, यह स्थिति तब बनी जब अवैध निर्माण और माफियाओं की मिलीभगत से पेड़ों की कटाई और जमीन समतलीकरण जारी रहा।
  • अवैध निर्माणों में शामिल हैं: कॉलोनियां, फार्महाउस, धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थान, जो जंगलों को “कंक्रीट के जंगल” में बदल रहे हैं। वन्यजीवों को अरावली में रहने के लिए जगह कम हो गई है।
  • वन विभाग की कमी और प्रशासनिक निष्क्रियता प्रमुख कारण हैं। भूमाफिया पुलिस या वनकर्मियों पर हमला भी कर चुके हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कांत एन्क्लेव और खोरी में अवैध बनावट हटाने और वन क्षेत्र का पुनःविकास करने का निर्देश दिया, लेकिन वन विभाग ने केवल एक पेड़-पौधे की खानापूर्ति-स्तरीय कार्रवाई की।
  • जड़ी-बूटियों और दुर्लभ पौधों का विनाश भी खास समस्या है। गूगल, बहेड़ा, आंवला, नीम, अर्जुन, गुलर जैसी कई प्रजातियाँ लगभग गायब हो चुकी हैं।
  • वन्यजीवों का अस्तित्व खतरें में: हरियाली और आवास के खत्म होने के कारण वन्यजीव अब नागरिक इलाकों की तरफ बढ़ रहे हैं, जो मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ाता है।Live Hindustan

स्रोत क्रेडिट:
यह पोस्ट Live Hindustan के लेख “अरावली में 1300 एकड़ वन क्षेत्र से हरियाली हो चुकी गायब” पर आधारित है।
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