Update 22 October 2021

ख़ोरी अपडेट

22-10-2021

साथियों

जिंदाबाद!

सर्वोच्च न्यायालय में हरियाणा सरकार की ओर से 400 पन्नों से ज्यादा का एक शपथ पत्र 21 अक्टूबर को दाखिल किया गया। जिसमें यह बताने की कोशिश की गई है कि पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम में परिवर्तन की जरूरत है। यदि परिवर्तन नहीं किया गया तो राज्य में बहुत परेशानी होगी। हरियाणा के 22 में से 11 जिले पूरी इस कानून के दायरे में आते हैं। यानी पूरी साइबर सिटी गुड़गांव भी इससे प्रभावित होती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने इस पर जवाब देने के लिए थोड़ा समय मांगा। अन्य केसों की ओर से भी समय मांगा गया। अदालत ने सभी पक्षों को इस पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 12 नवंबर तक की तारीख दी है और इस केस की अगली तारीख 15 नवंबर लगाई गई है।

इसके बाद पुनर्वास संबंधित मुकदमों पर सुनवाई हुई।

1– रेखा, पिंकी, पुष्पा बनाम भारत सरकार
 (विस्थापन की पूरी प्रक्रिया पर को चुनौती देने वाली याचिका)

2– “शांति, अनीता, बीना ज्ञान, सरोज पासवान व बब्बो बनाम भारत सरकार व अन्य” 
(सरकारी पुनर्वास नीति को चुनौती देने वाली याचिका)

वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने सर्वोच्च न्यायालय में इन मुकद्दमों के संदर्भ में कहा कि नगर निगम खोरी गांव से उजड़ो को डबुआ कॉलोनी में अस्थाई आवास के लिए पैसे जमा करने को कह रहा है। यह कोर्ट के पूर्व आदेश के खिलाफ जाता है। जिसमें उन्होंने कहा था कि लोगों को तकलीफ नहीं होनी चाहिए और जिस जिस को भी हटाया गया है। उनको आवास मिलना चाहिए। पैसे फाइनल रूप से फ्लैट आबंटन के बाद ही दिए जाएं।

 श्री संजय पारिख ने कहा कि जिन को आवास नहीं मिला है या जिन को आवास मिलने में देरी हुई है उन सब लोगों को पहचाना जाए। फिर उनको सोलेशियम की रकम दी जाए। पेटीशनर की तरफ से नगर निगम फरीदाबाद को दो पत्र जा चुके हैं। जिसमें बताया है की डबुआ कॉलोनी के फ्लैटों की हालत बहुत बुरी है। वहां पर पर कोई नहीं रह पाएगा। 

पारिख जी ने कहा की प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी गरीबों को आवास का वादा किया गया था । पर हरियाणा सरकार ने घरों का वादा करने का अपना अलग ही मापदंड बना लिया है। पहले से बने हुए फ्लैट खोरी गांव के लोगों को पैसे लेकर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ₹ 17,000 से 10,000 तक, कम करने की बात स्वीकार की है। और बाकी की किस्ते 15 की बजाय 20 साल में देने की बात भी कही है। इसलिए मैं इस विषय पर अभी कुछ नहीं कहूंगा।

इस बीच नगर निगम के वकील श्री अरुण भारद्वाज जी ने कोर्ट से कहा कि पुनर्वास संबंधी किसी भी समस्या के लिए सीधा मेरे को कहा जा सकता हैं। हम समस्या का समाधान करेंगे। पारिख साहब ने बताया कि हमने पहले ही आप को पत्र भेजे थे। जिसका निदान ना होने के बाद हमने अदालत में दोनों पत्र फाइल किये है।

अदालत ने खोरी गांव के विषय को जंगल की जमीन के विषय से अलग करते हुए उसे 12 नवंबर को पूरी तरह सुनने का आदेश दिया। 

अब जंगल की जमीन का मामला 15 नवंबर को और शांति देवी का केस 12 नवंबर को सुना जाएगा।

खोरी गांव के सहयोग में

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