फरीदाबाद। अरावली के खोरी में ध्वस्त किए गए करीब 10 हजार मकानों के निवासियों का दो साल बाद भी पुनर्वास नहीं किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी खोरी के लोगों को आशियाना नहीं मिल सका है। इसके विरोध में बुधवार को खोरी के लोगों ने नगर निगम मुख्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया। इसमें उजाड़ी गई जमाई कॉलोनी के भी कुछ लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने अतिरिक्त निगमायुक्त गौरव अंतिल को एक ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने पुनर्वास के लिए फिर से आवेदन लेने, लोगों को मकान का किराया देने, डबुआ फ्लैटों में जल्द से जल्द मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने और अरावली में बने फार्म हाउसों पर भी खोरी जैसी कार्रवाई करने की मांग की। अतिरिक्त निगमायुक्त के निर्देश पर तहसीलदार बीएस ढिल्लों को करीब 20 लोगों के आवेदन दिए गए।
सर्वोच्च न्यायालय ने सात जनू 2021 को खोरी समेत अरावली में करीब 10 हजार मकानों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे, आदेश पर अमल करते हुए वन विभाग और नगर निगम ने मकानों को ध्वस्त कर दिया और लोग बेघर हो गए। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी का पुनर्वास करने और पुनर्वास होने तक किराए के मकान का किराया देने के आदेश भी दिए थे, लेकिन नगर निगम ने करीब 1277 परिवारों को ही पुनर्वास के लिए पात्र पाया और उन्हें डबुआ में बने ईडब्ल्यूएस फ्लैट आवंटित किए।
प्रदर्शनकारी रेखा, रणधीर, आनंद, नजमा, ममता, मंजूर, विरेंद्र, सीमा व राखी आदि ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के दो साल पूरे हुए, लेकिन लोगों का पुनर्वास नहीं हुआ। नगर निगम ने दो वर्ष में मात्र 12 सौ परिवारों को पुनर्वास के लिए पात्र माना है। सरकारी दस्तावेज होने के बावजूद हरियाणा सरकार ने अधिकांश परिवारों की पात्रता को स्वीकार नहीं किया। जबकि 2018-19 में कराए गए राजस्व सर्वेक्षण में करीब 6,663 परिवार दर्ज किए गए थे। लेकिन यह जानकारी नगर निगम ने वेबसाइट से हटा दी।
खोरी के लोगों को नहीं मिला किराया
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर नगर निगम खोरी से बेघर हुए लोगों को 2000 रुपये प्रतिमाह मकान का किराया देना था। पात्र परिवारों में भी अधिकांश लोगों को किराया नहीं मिला है। नगर निगम ने खोरी से बेघर किए गए करीब 1277 परिवारों की पात्रता तय की है। इनमें से करीब 406 लोगों को ही किराया दिया गया है। बेघर हुए लोग अभी खोरी के दिल्ली और फरीदाबाद के आसपास के इलाकों में किराए पर रहते हैं। नगर निगम प्रशासन ने न्यायालय के आदेश पर डबुआ कॉलोनी में बने एक कमरे के फ्लैट को करीब 3.68 लाख रुपये की कीमत अदायगी की शर्त पर आवंटित किए हैं। फ्लैट में अभी तक करीब साढ़े चार सौ परिवार ही रहते हैं। मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण अन्य लोग वहां नहीं रह रहे हैं।
बड़खल एक्सटेंशन, जमाई कॉलोनी के लोगों का पुनर्वास नहीं
अरावली में बसे बड़खल एक्सटेंशन, जमाई कॉलोनी के करीब दो हजार मकानों को ध्वस्त किया गया, लेकिन इन इलाकों के लोगों का पुनर्वास नहीं किया गया और इनके पुनर्वास की कोई योजना भी नगर निगम के पास नहीं है। बुधवार को इन कॉलोनियों के कुछ उजड़े लोग भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
अरावली में बने फार्म हाउस को बचाने मे जुटी सरकार
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अरावली में बने फार्महाउस और अन्य संस्थानों को सरकार बचाने में जुटी है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने सभी को हटाने के आदेश दिए हैं, लेकिन बुलडोजर केवल गरीब लोगों पर चला। इसलिए न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाना चाहिए और अरावली में बने फार्म हाउस व अन्य संस्थानों को भी ध्वस्त करके अरावली को बचाया जाना चाहिए। या फिर खोरी के लोगों को भी उसी जगह पर फिर से बसाना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया जा रहा है। खोरी के लोगों की मांगों पर फिर से विचार किया जाएगा।
- गौरव अंतिल, संयुक्तायुक्त, नगर निगम
स्रोत/क्रेडिट
- Live Hindustan, समाचार: “खोरी गांव के लोगों को दो साल बाद भी नही मिला आशियाना”, प्रकाशित 7 जून 2023।
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