प्रस्ताव
नए एनसीआर रीजनल प्लान‑2041 के तहत दिल्ली‑एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 25 जिलों में विकास योजनाएं बनाई गई हैं। यह ड्राफ्ट प्लान एनसीआरपीबी (National Capital Region Planning Board) द्वारा तैयार किया गया था, जो 2021 की योजना को प्रतिस्थापित कर रहा है।

अंश:
पर्यावरण और अरावली को जोखिम
- ड्राफ्ट में प्राकृतिक संसाधनों के फैसले की ज़िम्मेदारी राज्यों को दी गई है, जिससे अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा कमजोर हो सकती है।
- “प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र” (Natural Conservation Zone – NCZ) जैसी परिभाषा को हटा दिया गया है, जिससे कानूनी संरक्षण और अधिक कमजोर पड़ गया है।
वन क्षेत्र में गिरावट
- 2021 की योजना में जहां वन क्षेत्र 4.02% था, वह 2041 ड्राफ्ट में घटकर 3.27% रह गया है।
- पहले की तरह 10% क्षेत्र को वन क्षेत्र बनाने का लक्ष्य भी इस बार नहीं रखा गया है।
रिकॉर्ड-आधारित ‘प्राकृतिक क्षेत्र’ निर्धारण का प्रभाव
- अब संरक्षण सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों को मिलेगा जो भूमि रिकॉर्ड में दर्ज हैं — लेकिन असलियत में अधिकांश अरावली क्षेत्र इन रिकॉर्ड्स में मौजूद नहीं हैं।
- जैसे हरियाणा में 50,000 एकड़ अरावली अभी तक वन क्षेत्र के रूप में दर्ज नहीं है — इसका मतलब यह हिस्सा संरक्षण से बाहर रह सकता है।
पर्यावरणविदों और नागरिकों की प्रतिक्रिया
- हजारों नागरिकों और विशेषज्ञों ने इस ड्राफ्ट का विरोध किया है।
- “अरावली बचाओ” आंदोलन की नीलम अहलूवालिया और अन्य कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह प्लान पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा और हवा-पानी के स्रोतों को खतरे में डालेगा।
स्रोत एवं क्रेडिट:
यह लेख Mongabay‑Hindi द्वारा प्रकाशित समाचार “एनसीआर ड्राफ्ट प्लान 2041 में संवेदनशील अरावली को नहीं मिला संरक्षण का भरोसा” पर आधारित है।
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