Update 05 February

खोरी अपडेट {237}

05 फ़रवरी 2026

जिंदाबाद साथियों!

4 फ़रवरी की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई का अपडेट:

इस सुनवाई को न्यायमूर्ति उज्जल भूयान और न्यायमूर्ति बी भी नागारथना जी सुन रहे थे।

सुनवाई की शुरुआत में ही जज़ साहब ने कहा कि यह बहुत ज्यादा टाइम खींच गया है। एक तो यह अतिक्रमणकारी है और हम इस केस को ले कर कितना खींच रहे हैं। अभी इसको डिसमिस करने का टाइम आ चुका है। और भारद्वाज भी उसमें काफी बोल रहे थे कि ये लोग पाइप तोड़ देते हैं। तो इसपे संजय परीख सर ने काफी दबाव डाल के बोला कि आप कोर्ट का आर्डर पढ़िए। सर ने यही बोला कि आप का ही आर्डर था। आपने जो लास्ट ऑडर दिया था आपका खुद का आर्डर तो पढ़िए। उसमें आपने जो जो बोला है वो तो मानिए। तो फिर उन्होंने वो बोला कि ठीक है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुँची कि मौजूदा स्थिति में विवाद का आपसी समाधान निकालने की कोशिश ज़रूरी है।

अदालत ने यह माना कि डबुआ कॉलोनी के फ्लैटों को लेकर जो शिकायतें और परेशानियाँ सामने आ रही हैं, उनका हल सिर्फ़ बहस से नहीं बल्कि बातचीत और मध्यस्थता से निकल सकता है। इसी वजह से कोर्ट ने यह मामला सुप्रीम कोर्ट मेडिएशन सेंटर को भेज दिया है। मेडिएशन सेंटर मतलब ऐसी जगह जहां दोनों पक्ष बैठक कर सके।

कोर्ट ने साफ़ निर्देश दिया है कि डबुआ फ्लैट के अलॉटी/याचिकाकर्ता पक्ष के प्रतिनिधि और
फरीदाबाद नगर निगम के प्रतिनिधि 18 फ़रवरी 2026 को दोपहर 3 बजे सुप्रीम कोर्ट मेडिएशन सेंटर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।

अदालत ने यह भी कहा है कि इस मामले के लिए अनुभवी और वरिष्ठ मेडिएटर नियुक्त किए जाएँ, ताकि बातचीत गंभीरता और निष्पक्षता के साथ हो सके। मेडिएशन की पूरी रिपोर्ट बाद में कोर्ट के सामने रखी जाएगी। वरिष्ठ मेडिएटर मतलब अनुभवी सीनियर व्यक्ति जो दोनों पक्षों की बात सुन कर रिपोर्ट बनाए।

कोर्ट ने संकेत दिया है कि मेडिएशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस मामले को फिर से सूचीबद्ध किया जाएगा और आगे की दिशा तय की जाएगी।

यह साफ़ है कि मामला अब एक नए मोड़ पर आया है। अब यह देखना अहम होगा कि मेडिएशन में क्या बात निकलती है और ज़मीन पर रहने वालों की असली समस्याओं को कितनी गंभीरता से सुना जाता है।

साथियों हम समझते है कि, आप लोगों के बहुत से सवाल होंगे कि अगर ये केस डिसमिस होता है तो उनका क्या होगा, जिनको अभी तक सेलेटियम का पैसा नहीं मिला या पूरा नहीं मिला, या जिनका नाम अभी तक नहीं आ पाया, तो साथियों आपको बता दें कि हम इन सभी बताओं को ध्यान में रख कर आगे की रणनीती तैयार कर रहे है। यह लड़ाई बहुत लंबी है हौसला रखिए लड़ेंगे जीतेंगे!

टीम साथी!