जिंदाबाद साथियों!
खोरी गांव का 15 अगस्त: स्वतंत्रता, संघर्ष और यादों का दिन
ध्वजारोहण और विमल भाई जिनकी आज पुण्यतिथि है, उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”
इस वर्ष 15 अगस्त का कार्यक्रम डबुआ कॉलोनी के साथियों के साथ मिलकर बड़े जोश और एकजुटता के साथ मनाया गया। तिरंगा लहराया गया, देशभक्ति के गीत गाए गए और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को याद किया गया। इस मौके पर विमल काका की याद में श्रद्धांजलि भी दी गई और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया।
विमल भाई: संघर्ष के साथी और प्रेरणास्त्रोत
आज 15 अगस्त का पावन दिन है – हमारी आजादी का 79वां जश्न। लेकिन इस जश्न के बीच, हमें उन संघर्षों को याद करना चाहिए जो आज भी जारी हैं, और उन योद्धाओं को जिन्होंने अपना जीवन इन संघर्षों को समर्पित कर दिया। आज, हम खोरी गांव की लड़ाई को याद करते हैं, जहां हजारों लोगों के घर उजाड़ दिए गए, और उनके हक़ की लड़ाई आज भी ज़ारी है। और विशेष रूप से, हम याद करते हैं हमारे प्रिय एक्टिविस्ट विमल भाई को, जिनकी आज पुण्यतिथि है। विमल भाई, जो 15 अगस्त 2022 को हमें छोड़कर चले गए, लेकिन उनके संघर्ष की लौ आज भी जल रही है।
विमल भाई एक सच्चे गांधीवादी थे। उन्होंने टिहरी बांध विरोधी आंदोलन से अपनी यात्रा शुरू की, जहां उन्होंने पहाड़ों की रक्षा के लिए आवाज उठाई। नर्मदा बचाओ आंदोलन में उन्होंने विस्थापितों के हक़ के लिए लड़ाई लड़ी, पर्यावरण संरक्षण के लिए एंटी-माइनिंग आंदोलनों में सक्रिय रहे, और कई बड़े-बड़े आंदोलनों को दिशा दी। लेकिन उनके जीवन के आखिरी वर्षों में, वे खोरी गांव के लोगों के साथ खड़े हुए। खोरी गांव, फरीदाबाद में बसा वह बस्ती, जहां 2021 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हजारों घरों को ध्वस्त कर दिया गया, विमल भाई ने इस आंदोलन को नई ऊर्जा दी – उन्होंने विस्थापितों को संगठित किया, शिक्षित किया, और न्याय की लड़ाई में उनका साथ दिया। वे ‘विमल काका’ बन गए थे उन लोगों के लिए, जो अपना सब कुछ खो चुके थे।
खोरी गांव की लड़ाई सिर्फ घरों की नहीं, बल्कि मानव अधिकारों की है। सरकार ने पुनर्वास योजना की घोषणा की – डाबुआ कॉलोनी में ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स देने का वादा किया। लेकिन आज भी, कई लोग पात्रता की सूची से बाहर हैं। सैकड़ों परिवार आज भी मलबे के बीच जी रहे हैं, बेघर, और असुरक्षित। क्या यही है हमारी आजादी? जहां गरीबों के हक़ छीने जा रहे हैं, और विस्थापितों को न्याय नहीं मिल रहा?
विमल भाई हमें सिखाते थे कि संघर्ष कभी रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने खोरी गांव के लोगों को सिखाया कि कैसे एकजुट होकर लड़ें, कैसे कोर्ट में अपनी बात रखें, और कैसे सरकार से जवाब मांगें। आज, उनकी पुण्यतिथि पर, हम वचन लें कि हम उनकी विरासत को आगे बढ़ाएंगे। उन लोगों के लिए लड़ेंगे जो अभी तक फ्लैट्स के लिए पात्र नहीं बने, जिनके आवेदन रद्द हो गए, या जो पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं। हमें मांग करनी होगी – पूर्ण पुनर्वास, बुनियादी सुविधाओं के साथ फ्लैट्स, और सभी विस्थापितों को न्याय मिले।
साथियों, आजादी का मतलब सिर्फ झंडा फहराना नहीं, बल्कि हर नागरिक के हक़ की रक्षा करना है। विमल भाई की तरह, हमें पर्यावरण और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाना होगा। आइए, उनके संघर्ष को सलाम करें, और खोरी गांव की लड़ाई को मजबूत करें।
लड़ेंगे जीतेंगे ! लड़े है जीते है!
टीम साथी!





