खोरी अपडेट {226}
10 मई 2024
जिंदाबाद साथियों !
जैसा की हमने अपने पिछले अपडेट में बताया था कि आईआईटी को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अदालत में एक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा गया है। आज की सुनवाई में जजों ने प्रक्रिया में देरी के लिए आईआईटी को फटकार भी लगाई जिसके बाद आईआईटी ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने एमसीएफ से कुछ जरूरी दस्तावेज मांगे थे लेकिन एमसीएफ से उन्हें वो दस्तवेज नहीं मिले। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि चूंकि डबुआ का निरीक्षण एक बड़ा काम है, इसलिए उन्होंने एमसीएफ से एक बाहरी एजेंसी नियुक्त करने का अनुरोध किया था परंतु एमसीएफ ने अभी तक इन एजेंसियों के नाम आईआईटी के साथ साझा नहीं किए और न ही किसी को नियुक्त किया, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई।
जवाब में जजों ने फिर से आईआईटी को फटकार लगाई कि उन्हें यह काम सितंबर 2023 में दिया गया था, इसलिए अगर उन्हें किसी चुनौती का सामना करना पड़ा तो उन्हें तुरंत अदालत को सूचित करना चाहिए था। आठ महीने की देरी क्षमा करने योग्य नहीं है. इसके बाद न्यायाधीशों ने आईआईटी को एजेंसी नियुक्त करने की जिम्मेदारी लेने का आदेश दिया।
जबकि एमसीएफ को आदेश दिया की वह एजेंसी के काम के लिए प्रतिपूर्ति करेगा।
पिछली सुनवाई में खोरी गांव के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारीख जी ने निवासियों द्वारा प्रस्तुत अपीलों के बारे में प्रश्न पूछे थे जिसके उत्तर में एमसीएफ के वकील अरुण भारद्वाज जी ने आज अदालत को बताया कि अधिकांश आवेदनों को खारिज कर दिया गया हैं। वे उन अस्वीकृतियों और कुछ योग्य पाए गए लोगों को जल्द ही वेबसाइट पर अपलोड करने जा रहे हैं। जैसे ही टीम साथी को सूची मिलेगी, हम विवरण की जांच करेंगे और इसे खोरी अपडेट के माध्यम से साझा करेंगे।
हम अपने वकीलों के साथ चर्चा कर रहे हैं कि जिनके आवेदन खारिज कर दिए गए हैं, उनके लिए अगला कदम क्या उठाया जा सकता है। हम जल्द ही इस संबंध में सभी के साथ एक खोरी चर्चा का आयोजन करेंगे।
हिम्मत नही हारेंगे, लड़ेंगे जीतेंगे!
टीम साथी!