खोरी अपडेट (205)
7-सितंबर-2023
जिंदाबाद साथियों!
आज हम आपको खोरी गाँव के हालात के बारे में, डबुआ की स्थिति, और कोर्ट केस के बारे में बताने जा रहे हैं।
लगातार कई दिनों से यह मामला कोर्ट में बार बार तारीख आगे बढ़ाया जा रहा था, हमारी मजबूत तैयारी के बावजूद जैसे 2 जुलाई टीम साथी का रिपोर्ट तैयार करना, 12 जुलाई के GPS फ़ोटो,15 अगस्त जन सुनवाई में निवासियों द्वारा सभी मुद्दों को सुना जाना व स्वयं सजंय पारिख जी द्वारा निरक्षण किया जाना,
सुनवाई से पहले 2 सितम्बर को EWS फ्लैट डबुआ पुनर्वासित निवासियों ने टीम साथी को बुलाया और वहाँ की मुख समस्या को एक बार फिर से दिखाया साथ ही टीम साथी के साथ खड़े होकर एकता का प्रतीक दिया। आखिर कार 5 सितम्बर को कोर्ट में हमारा मुकदमा सुना गया। हम इस अपडेट के साथ ही कोर्ट के आर्डर WP(C) 788/2021का कॉपी भेज भी रहे हैं ।
इस सुनवाई को टीम साथी व डबुआ और खोरी के साथियों ने मिलकर एक साथ सुनवाई सुना।
कोर्ट मे हुयी बातें,
-एमसीएफ के वकील भारद्वाज ने यह कहकर चर्चा शुरू किया की समिति ने प्रत्येक फ्लैट की जांच की है और प्रमाणित किया है कि यह रहने के लिए उपयुक्त है। फिर उन्होंने शिकायत किया कि केवल 180 खोरी गांव निवासियों ने डबुआ कॉलोनी में कब्जा लिया है व पात्र पाए गए 1072 निवासियों में से 340 से अधिक ने अपने फ्लैट मे ताला बंद कर दिए हैं। और डबुआ की मरम्मत के लिए हम इतना पैसा खर्च कर रहे हैं लेकिन कब्जा नहीं ले रहे हैं,
जवाब में, नगर निगम की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए,
वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख जी ने अदालत को याद दिलाया कि लगभग 5061 निवासियों ने अपने पुनर्वास आवेदन दायर किए थे, जिनमें से 3091 खारिज कर दिए गए हैं। लगभग 760 परिवारों ने हाल ही में अस्वीकृतियों के खिलाफ अपनी अपीलें दायर की हैं और हमें अभी भी पात्र लोगों की नई सूची नहीं मिली है।
अगर डबुआ में फ्लैट नहीं हैं तो एमसीएफ को बाकी लोगों के लिए भी इंतजाम करना होगा। चाहे नए फ्लैट बनाने पड़े संजय जी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि अपील और अस्वीकृति के बारे में जानकारी लोगों को व्यक्तिगत रूप से नहीं भेजी जा रही है, इसलिए कई लोग अपनी अपील दायर करने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें एक और मौका देना होगा ।
न्यायाधीशों ने सहमति व्यक्त की और एमसीएफ को विभिन्न तरीकों से – लोगों को फोन पर कॉल करना, संदेश, समाचार पत्र की घोषणाओं आदि के माध्यम से जानकारी भेजने को कहाँ।
जब चर्चा डबुआ पर केंद्रित हुई तो भारद्वाज ने कहा कि न्यायालय द्वारा नियुक्त वास्तुकार सुश्री मोंडोल ने भी प्रमाणित किया है कि डबुआ अब रहने योग्य है।
हमारे वकीलों ने इस रिपोर्ट पर गंभीर आपत्ति जताई और कहा, ”हमने खुद डबुआ जाकर 15 अगस्त को सब कुछ देखा, हमने वहां के निवासियों से बात की ये तस्वीरें हमने खींची थीं जिन्हें रिपोर्ट में पेश किया गया है आप कैसे कह सकते हैं” जब सीवेज, पानी, बिजली, रिसाव और जलभराव से जुड़ी समस्याएं हों तो क्या वह स्थान रहने योग्य है ?
MCF वकील भारद्वाज ने जवाब दिया कि हम इस जगह को यहां के निवासियों के लिए ताज महल नहीं बना सकते। और खोरी गांव निवासियों पर पाइप और अन्य फिक्स्चर खुद तोड़ने का आरोप लगाया।
हमारे वकील इन आरोपों से नाराज थे और न्यायाधीशों से डबुआ जाकर खुद देखने को कहा। जवाब में जजों ने कहा कि हम डबुआ का निरीक्षण करने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी का गठन करेंगे और एक रिपोर्ट देंगे क्योंकि दोनों पक्ष बहुत अलग बातें कहते हैं। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि इस निरीक्षण के लिए आईआईटी दिल्ली की एक टीम से संपर्क किया जाएगा और जल्द ही एक रिपोर्ट सौंपी जाए।
की यह सभी सही हैं या नहीं।
जब भारद्वाज ने तर्क दिया कि रिपोर्ट में एक महीने का समय लग सकता है, इसलिए सोलैटियम राशि को रोकना होगा क्योंकिं जो लोग नहीं रह रहे उनको को यह राशि देना पड़ रहा हैं, तो न्यायाधीशों ने इस अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया।
इसके बाद भारद्वाज ने न्यायाधीशों से उन बचे हुए 365 निवासियों के आवंटन रद्द करवाने की कोशिश की, जिन्होंने अभी तक अपना कब्ज़ा पत्र नहीं लिया है। हालाँकि, हमारे वकीलों ने बताया कि लोग डबुआ में नहीं गए हैं या कब्जा नहीं किया है क्योंकि फ्लैट अभी भी रहने लायक नहीं हैं। इसलिए इन्हें रद्द नहीं किया जाना चाहिए, इस पर जजों ने सहमति जताई ।
इन सबके बीच 1 सितम्बर को हमारे टीम साथी विमल काका के घर से RGS-IBG का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बात रखने का मौका मिला। 2000 से ज्यादा भूगोलविद पूरी दुनिया से इसमें शामिल थे। सम्मेलन लंदन में हुआ, इसलिए हमने ऑनलाइन माध्यम से खोरी गावँ की आवाज सुनाया। हमें कामयाबी मिली। भुगोलविदों ने हमारी तारीफ की। प्रोत्साहन भी मिला। हम मेहनतकश हैं। हम संकल्पित हैं। हम संघर्ष करते रहेंगे, न्याय मिलने तक।
आगे की प्रक्रिया और जटिल मुश्किल भरी होगी जिसमें आप सभी को इस मौके को एक साथ मिलकर तैयार रहना होगा जैसे आज तक लड़ते आये हैं वैसे ही आगे भी आपके साथ टीम साथी खड़ा रहेगा ।
हजार की लड़ाई जीती हैं हजारों की लड़ाई जितनी बाकी हैं !
आपकी अपनी टीम साथी!