खोरी अपडेट (190)
08-06-2023
जिंदाबाद साथियों !
7 जून 2021 को सर्वोच्च न्यायालय ने जंगल की जमीन बताते हुये खोरी गाँव को तोड़ने का आदेश दिया और एक झटके मे 1 लाख से अधिक मेहनतकश लोगों जिंदगी बदल गयी और लोग दर दर भटकने को मजबूर हो गए।
सुप्रीम कोर्ट के विध्वंस आदेश के दो साल* के मौके पर न्याय की मांग को ले कर कल यानि 7-जून 2023 को एमसीएफ़ (MCF) कार्यालय के सामने धारणा दिया अपने संविधानिक अधिकारों के साथI
जिसमे डेढ़ सौ के करीब खोरी निवासी व जमाई कॉलोनी के निवासी और भारतीय गौरव संघ वह अन्य फरीदाबाद की बस्तियों के लोग शामिल हुएI सुबह 10:00 बजे से लगातार धरने पर बैठे रहे और अपनी मांगों के लिए डटे रहे परंतु जब कोई एमसीएफ़ के अधिकारी बाहर नहीं आयें तो खोरी निवासी नगर निगम ऑफिस के अंदर गए वहां पर ज्वाइन कमिश्नर गौरव अंतिल से मिले और उनके सामने हमने एक-एक करके अपने सारे मुद्दे रखेंI
निवासियों ने अनुरोध किया कि जो लोग पिछली समय सीमा के भीतर अपने पुनर्वास फॉर्म नहीं भर पाये थे उन्हें दुबारा से आवेदन करने की अनुमति दी जाएI बचे हुए सभी परिवारों को पुनर्वास में शामिल किया जाएI और जो लोग अपना अपील फॉर्म जमा नहीं कर पाये उनके लिए 1 माह का समय बढ़ाएँ जाए जिससे लोग अपना अपील फॉर्म जमा कर सकेI और साथ ही हमने यासी सर्वे का मुद्दा भी रखा, और हमने लोगो के कागजात जमा लेने लिए एमसीएफ़ के अधिकारियों को राधास्वामी में बैठने के लिए भी कहाI
उनसे सवाल किया गया की लोगो के पास पर्याप्त दस्ताबेज होने के बाद भी उनके फॉर्म को अस्वीकृत क्यों कर दिया गया तो गौरव अंतिल ने तर्क दिया कि प्रत्येक अस्वीकृति के लिए कारण हमारे वैबसाइट पर दिया गया है। फिर जब लोगों ने अपने अस्वीकृति पत्र प्रस्तुत किए, और कहा सभी अस्वीकृति पत्र मे एक ही कारण लिखा है अस्वीकृत करने का, जो स्पष्ट रूप से नज़र आ रहा है की सभी मे कॉपी-पेस्ट किए गए है, तो इस बात पे गौरव अंतिल संतोषजनक उत्तर देने में असमर्थ थे।
हमने 5 पेजों का ज्ञापन उनको सौंपा जिसमें विस्तार से हमारी मांगे हैं और गौरव अंतिल ने बीएस ढिल्लों से मिलने के लिए कहा बाकी मामले के लिए क्योंकि खोरी गांव का मामला बीएस ढिल्लों ही देखते है वहां पर जाने के बाद काफी देर तक बात हुई हमने कहा आप पारदर्शिता के साथ सभी खोरी निवासियों के सामने आकर अपनी बात रखें और उन निवासियों को भी अपनी बात रखने का मौका दें लेकिन वह नहीं माने उनका व्यवहार बिल्कुल अच्छा नहीं था परंतु हम वहां से हिले नहीं । अंतिम में आए हुए लोगों का फॉर्म लेने के लिए वह तैयार हो गायें I
साथ ही हमने 5 पेजों का ज्ञापन की कॉपी एमसीएफ (MCF) कमिश्नर जितेंद्र दहिया को भी ईमेल के माध्यम से भेजा है।
हालांकि, यह देखा जाना बाकी है कि क्या एमसीएफ की आज कागजात स्वीकार करने की कार्रवाई केवल दबाव का परिणाम थी या क्या वे वास्तव में निवासियों की चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक कदम उठाएंगे I
कल के कुछ मीडिया कवरेज के लिंक।
Desh Rojana: गरीबों को तोड़ दिया अमीरों को छोड़ दिया #KhoriGaon
PNI News: पुनर्वास की मांग को लेकर फरीदाबाद नगर निगम के कार्यालय के बाहर विशाल धरना
खोरी गाँव के साथ और सहयोग मे
टीम साथीI